लोकतन्त्र में आखिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का क्या अर्थ हैं?
क्या एक व्यक्ति द्वारा अपनी निरपेक्ष व स्वछंद अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में व्यक्ति कि भावनावो, भावों, कुंठावों को तुष्ट करना व समाज कि अन्तरनिर्भर, समेकित, समंवयकारी, सामंजस्यपूर्ण, सामुहिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को तोड़ना हमें इस विनाशक स्वछंद बाजारू लोकतन्त्र में स्वीकार्य हैं ?
विवादास्पद लेखक सलमान रूश्दी का एक आयोजन में आने का सस्पेंस बरकरार रखना एक अर्थ में लोकतन्त्र व जीवन मूल्य के प्रमुख सवाल को पुन्ह केन्द्र में ला देना है.
विवादास्पद लेखक सलमान रूश्दी पर सस्पेंस बरकरार रहा हैं. सस्पेंस में ही लोकतन्त्र अपननी सर्वस्वीकार्यता, ग्राह्यता, सार्थकता व इकलोती वैकल्पिक व्यवस्था के टिकाउपन होने का भ्रम जिन्दा रखता हैं. यह विचार पूंजीवादी बाजार को जीवित रखने का नुस्खा भी हैं. लोकतन्त्र में सस्पेंस व भ्रम ही विचार का बाजार हैं. निरपेक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सापेक्ष सत्य कि भी बाधक हैं. एक कटु सचाई हैं कि हमें लोकतांत्रिक व्यवस्था के मूल्यों के विरोध बिना विकल्प दिखता ही नहीं ! हम जाने अनजाने इन्ही भेडियों के शिकार हैं.
आयोजन का चारित्रिक परिणाम देखे :-
उत्सव आयोजको को प्रचार मिलेगा, आखिर लोकतन्त्र के समय में हम किसी कार्यकर्मो के सफल होने का कोनसा पैमाना सामने रखते हैं. जो अधिक लोगों द्वारा पढ़ा, दिखा, सुना नहीं गया हों व चर्चित नहीं हों वह भला आप ही बतावे केसे सफल हों सकता हैं? लोकतन्त्र में सत्य व स्वीकार्य होने के तो ये ही पैमाने होते हैं. अगर यह नहीं हों तो खर्चा भी कंहा से आता हैं. लोकतन्त्र में विचार व आयोजन व्यापार हैं तथा जो मात्र इसे पूंजीवाद समजता हैं वह दिग्भ्रमित हैं.
उत्सव आयोजको को प्रचार मिलेगा, आखिर लोकतन्त्र के समय में हम किसी कार्यकर्मो के सफल होने का कोनसा पैमाना सामने रखते हैं. जो अधिक लोगों द्वारा पढ़ा, दिखा, सुना नहीं गया हों व चर्चित नहीं हों वह भला आप ही बतावे केसे सफल हों सकता हैं? लोकतन्त्र में सत्य व स्वीकार्य होने के तो ये ही पैमाने होते हैं. अगर यह नहीं हों तो खर्चा भी कंहा से आता हैं. लोकतन्त्र में विचार व आयोजन व्यापार हैं तथा जो मात्र इसे पूंजीवाद समजता हैं वह दिग्भ्रमित हैं.
जब लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित जीवन शेली में निजी व व्यक्तिगत स्वतन्त्रता, स्वछंदता तथा अभिव्यक्ति को नव-संचार माध्यमों ने उन्मुक्त पंख दिए हैं जिसके ऊपर बैठकर प्रसिद्धि, सम्मान, यश पाया जा सकता हैं तथा यह मार्ग भी दोलत कि रुमानियत कि तरफ़ ले जाता हैं तो फिर कोई व्यक्ति अब इस दोर में विरला ही होगा जो इस स्वर्ग के सुख को ना भोगे पाये व अवसर मिलने पर ना चुके ! यंहा अवसर पतन भी हैं, समाज व व्यक्ति दोनों का !पतंगे को तेज प्रकाश व व्यक्ति को नये दोर का लोकतन्त्र !
लोकतंत्र में व्यक्ति कि स्वतंत्रता सर्वोपरि होती हैं :-
इसे निरपेक्षत स्वतंत्रता इस कारण भी कहते हैं कि यंहा स्त्री-पुरुष के शारीरिक समबन्ध को केवल शारीरक सुख भोगने कि प्रमुखता व स्रजन को मूलतः गोण रूप में अपनाया व माना जाता हैं. इस तरह उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता ब्रह्माण्डीय नियम व शाश्वत सत्य के विरुद्ध होकर जीव को जीवन स्रजन कि लुप्त अवस्था की तरफ़ ले जाती हैं.
इसे निरपेक्षत स्वतंत्रता इस कारण भी कहते हैं कि यंहा स्त्री-पुरुष के शारीरिक समबन्ध को केवल शारीरक सुख भोगने कि प्रमुखता व स्रजन को मूलतः गोण रूप में अपनाया व माना जाता हैं. इस तरह उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता ब्रह्माण्डीय नियम व शाश्वत सत्य के विरुद्ध होकर जीव को जीवन स्रजन कि लुप्त अवस्था की तरफ़ ले जाती हैं.
हम अगर सापेक्षता पर गहराई से बात करे तों पूरा ब्रह्मांड ही सापेक्ष, अन्तरनिर्भर, समंवयन के नियम से चलता हैं. निरपेक्ष कोई भी वस्तु व जीव अपने ब्रह्मांडीय नियम कि अनुपालना में हों ही नहीं सकता हैं . व्यक्ति एक उन्नत प्राणी ही हैं तथा व्यक्ति कि धार्मिक व वैज्ञानिक दोनों व्याख्या व धारणा उसे ब्रह्माण्डीय नियम के अनुसार ही हमें देखने, समजने को कहती हैं व अगर कोई भी व्यवस्था व संगठन सत्ता इस शाश्वत सत्य कि अनुपालना नहीं करती हैं तों वह मानव को विनाश कि तरफ़ ही ले जाती हैं. हम लोकतन्त्र कि परिभाषा को इस सत्य कि कसोटी पर परखकर देखे !
अब कहा गया कि सलमान रूश्दी को जान का खतरा हैं अतः वे शायद नहीं आयेंगे :-
अब इस मुधे पर ताजा खबर. जो कि बासी भी हैं. घोषणा हों गई व कह दिया कि जान का खतरा हैं वों नहीं आयेंगे ! अब बतावो इनको जान का खतरा कब नहीं था ? फिर क्यों सस्पेंस पैदा किया? क्योंकि सस्पेंस में आशंका, सम्भावना व जोखिम हैं तथा यही विचार लोकतन्त्र के बाजार का एक आधार भी हैं. आप जाँच करलो इस लोकतंत्र में कि उन्हें अब जान का खतरा पैदा हुवा या पहले भी था क्या सचाई का पता लगा सकते हों? इस आयोजन के दोरान भीड़ इतनी उमड़ी कि काबू करना ही मुश्किल हों रहा हैं . अब हम माने या ना माने लोक, आगंतुक व "स्वतन्त्र समीक्षक" तों इसे ही सफल कहेंगे !विवाद, विरोध, आतंक का साया व डर, सस्पेंस व प्रतिबंध इन सभी आवश्यक कारकों कि बिना क्या मात्र पूँजी के बूते इतना सफल व स्वीकार्य आयोजन इस व्यवस्था में हों सकता हैं? आप ही बतावें ? अतः मूल प्रश्न तों लोकतंत्र के चरित्र को समजने से जुड़ा हुवा हैं .
अब इस मुधे पर ताजा खबर. जो कि बासी भी हैं. घोषणा हों गई व कह दिया कि जान का खतरा हैं वों नहीं आयेंगे ! अब बतावो इनको जान का खतरा कब नहीं था ? फिर क्यों सस्पेंस पैदा किया? क्योंकि सस्पेंस में आशंका, सम्भावना व जोखिम हैं तथा यही विचार लोकतन्त्र के बाजार का एक आधार भी हैं. आप जाँच करलो इस लोकतंत्र में कि उन्हें अब जान का खतरा पैदा हुवा या पहले भी था क्या सचाई का पता लगा सकते हों? इस आयोजन के दोरान भीड़ इतनी उमड़ी कि काबू करना ही मुश्किल हों रहा हैं . अब हम माने या ना माने लोक, आगंतुक व "स्वतन्त्र समीक्षक" तों इसे ही सफल कहेंगे !विवाद, विरोध, आतंक का साया व डर, सस्पेंस व प्रतिबंध इन सभी आवश्यक कारकों कि बिना क्या मात्र पूँजी के बूते इतना सफल व स्वीकार्य आयोजन इस व्यवस्था में हों सकता हैं? आप ही बतावें ? अतः मूल प्रश्न तों लोकतंत्र के चरित्र को समजने से जुड़ा हुवा हैं .
लोकतन्त्र का विरोधाभासी द्वंद :-
वों नहीं आ रहें हैं पर हम इस विरोधाभासी लोकतन्त्र के द्वंद को तों समजे जिसने कि सत्य को समजने व ज्ञान अर्जित करने को कठिन कर हमें विनाश कि तरफ़ धकेलने कि कोशिश कि हैं !
वों नहीं आ रहें हैं पर हम इस विरोधाभासी लोकतन्त्र के द्वंद को तों समजे जिसने कि सत्य को समजने व ज्ञान अर्जित करने को कठिन कर हमें विनाश कि तरफ़ धकेलने कि कोशिश कि हैं !
संजॉय राय ने कहा है कि रूश्दी भले ही न आ रहे हों पर वे वीडियो लिंक के जरिए सम्मेलन को सम्बोधित कर सकते हैं. इस आयोजन में रूश्दी पर सस्पेंस पैदा कर ऐसे बताया जा रहा हैं कि जेसे सभी लेखक उनको ही सुनने के लिये इकठ्ठे किये गए हों ! एक बुगला भगत ने कहा, 'हर किसी के पास दूसरे को दुख पहुंचाने का अधिकार है, दुसरे अर्थो में सुख का ना तों कर्तव्य, उतरदायित्व व ना अधिकार ! केसा होता हैं बुगला भगत आप जानते होंगे ! हम हंस व बुगले में फर्क तों कर ही सकते हैं !
आखिर हम लोकतंत्र व व्यक्तिगत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को फिर क्यों नहीं परिभाषित करे व परखे तथा हम एक समयानुकूल वैकल्पिक व्यवस्था का समय रहते निर्माण करें .


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